Tuesday, 9 August 2011

   मित्रो नमस्कार,मै उत्तर प्रदेश का मूल निवासी हूँ उससे  पहले मै एक भारतीय हूँ,मैं मुंबई मे रहता हूँ और मैंने केसी कॉलेज से हिंदी पत्रकारिता  मे एक साल का डिप्लोमा का कोर्स किया है,मै अपने जीवन के सुरवाती दौर से ही परतियोगिता जैसे कार्यो मे भाग लेता था, मेरी रूचि हमेसा सामाजिक कार्यो मे थी. जिसके वजह से हमारे पिता स्व .श्री जग्गनाथ दुबे जी की परम इच्छा थी की मै वकील बनू या अद्यापक, जैसा  की वकील बनना तो ठीक था मगर अध्यापक बनना मुझे एकदम नापसंद था कियोकी मै हमेसा पदाई में  दुसरे कर्मांक का क्षात्र रहा था .....कुछ  समय बाद पिता जी काफी वीमार हो गये जिसमे मै काफी उलक्ष गया लगातार दो साल वीमारी के चक्कर मे हम एक दम टूट गए और अंत समय मे पिता श्री परलोक को  गमन हो चले ....मै एकदम सा टूट गया क्योकि पिता जी का काफी मुझे सहयोग मिलता था ..कुछ समय बाद मै छोटी -मोटी नौकरी किया ...मुंबई से पूना चला गया काम के सिलसिले मे वहा पर मै एक कंपनी मे सुपर विजन का काम मे लग गया .....हमारा काम रात मे होता था ..मुझे एक दिन सपने  में  पिता जी आये और बोले तुमने मेरे इच्छा पूरी नही किया ..बस मै सुबह   सोच मे पड़ गया की क्या करू जिससे अपना खर्चा भी चलना चहिये और समाज से जुड़ा कार्य हो ..नेता तो बन सकता नही था वकील के लिए पैसा व तीन साल का समय ,,,मै बहुत सोच   मे पड़ गया दिन भर इसी उधेड़ बुन मे बिता ,,,,मै नवभारत times  हिंदी पेपर का जबर्दस्त पाठक हूँ बस उसी दिन उसमे के सी मे पत्रकरिता कोर्स  का प्रकाशन हुआ था ...बस मैंने आव ना देखा ताव तुरंत कॉल किया और पूरी जानकारी लिया फीश २५००० हजार, किस्त मे भी चलेगा,आदि मिला , मै पूना से  मुंबई आया और दाखिला के लिए फोर्मं भर दिया मुझे बताया गया की इन्तेर्विएव  होगा तब जाकर दाखिला होगा ..मै पूना वापस aagya  और अपनी  तैयारी मे लग गया जैसा की पूना मे नवभारत times  पेपर  बहुत काम मिलता है  पेपर लेने के लिए मै १० रूपये जयादा देकर रखता था ...की कब बुलावा आ जाय एक दिन छोडकर रोज केसी कॉलेज  मे फ़ोन करता ....बस आ गया बुलावा समय के अनुसार मै एक घंटे पहले ही पहुच गया ..मेरा नाम बुलाया गया ,  मै रोज पेपर पड़ता था ..जैसा की इन्तेवीव में  सफल हुआ श्री भूपेंद्र त्यागी जी ने इंटरविव  लिया था जो नवभारत times मे sr संपादक है ......आज भी मै उन्हें अपना गुरु मानता हूँ मैंने 1st क्रमांक से पत्रकारिता कोर्ष का कार्य  सफल किया ...उसके बाद वह वक्त मंदी के दौर था इसलिए जहा मिले ज्वाइन कर लो यह बताया  गया ,मै महुआ न्यूज़ मे ज्वाइन किया कुछ समय तो इन्तेर्शिप किया फ्हिर जॉब की बात पर कुछ सकारात्मक जवाब नही मिला..धीरे धीरे मुझे तंगी का  सामना करना पड़ रहा था ..तब मुझे बस पैसे के लिए कही दुसरे जगह ज्वाइन करना पड़ा  उस समय a2z न्यूज़ चैनेल नया आया था सभी लोग ने राय दिया की ज्वाइन कर लो मै वहा पर गया mr ...से बात हुयी बोले ३००० हजार मिलेगा तीन महीने बाद बडाये गे (मरता क्या ना करता  )मै ज्वाइन किया सोचा अच्छा समय आ जायगा, यहा पर मुझे बस स्क्रिप्ट लिखो ,चैनल्स सर्च करो यही काम देते मैंने सर को एक दिन कहा मुझे कम  से कम एक स्टोरी पर जाने दिया जाय .जवाब मिला की   अभी अपनी स्क्रिप्ट सुधारो,, लिंक बनाओ .वही पर .कुछ दिन बाद एक महिला जी ने ज्वाइन किया,और अभी वह पत्रकारिता की  पढाई कर रही थी बस उनको दो- तीन दिन बाद रिपोटर का कार्ड मिला ,५००० हजार पगार था उसी दिन से मुझे दुःख हुआ लेकिन मै किसी से बोल नही पाया , कुछ दिन बाद कुछ लोग वहा से हट गये तो मुझे मौका मिला काम करने का लेकिन पगार .मे कोई इजाफा नही था .टाइम सुबह ९.३०.to १०.३० ,मै कई बार बोल चूका लकिन बदलाव नही ह्युआ ...उसके बाद वहा का माहोल एक दम अलग सा हो गया कहा जाता वसूली वाली स्टोरी करो मै इसका विरोध किया ..जिसके बाद मुझे मजबूरन वहा से काम छोड़ना पड़ा ..मै काफी चिंतिः हुआ किसे फ़ोन करू कुछ विस्स्नीय लोगो को फोन किया बस यही जवाब मीडिया की हालत एक दम ख़राब है बताता हूँ ..मै एक दम ड़र गया   अब क्या करू सब कुछ छोड़ कर इस लाइन मे आया था ,,एक दिन ऐसे ही काम के लिए बाहर गया तो एक दोस्त ने मुझे बताया की मैगजीन मे काम करना है तो कल फला जगह जाकर इन्तेर्विव दे दो मै वहा पर गया और ज्वाइन  किया जहा आज मै  रिपोटर के पद पर हूँ यह मैगज़ीन मारवाणी समाज की है अथार्थ होम मैगज़ीन है जिसमे सिर्फ उनके समाज के बारे मे लिखा जाता है .(.बाय लाइन नही देगे ,,विज्ञापन की बात करना पड़ेगा , ३० दिनों तक काम करना होगा) अअदि  यहा के नियम है मै ने सोचा मना कर दू लेकिन  (मरता क्या न करता)  मै बोला की बाय लाइन नही मिलेगा ठीक है पर विज्ञापन की बात मै नही करुगा १३००० हजार पगार बोला गया बस उसी तरह से एस पत्रकारिता के क्षेत्र को..सञ्चालन करते हुए निरंतर लगा  हूँ.. और  यही कुछ अपनी कहानी है जिसे मै आप से खुलासा किया है  मै तो समाज सेवा की सोचा था पर यहा तो चाटुकारिता की पूरी जमात बैठी है अर्थात मरता क्या न करता  बस अब यही पर अपनी लेखनी को विराम देना चाहता हूँ एस लेखनी में कही कुछ अनजान बस पत्रकारिता जगत की कुछ मान हानि हो गयी हो तो मुझे अबोध समझकर माफ़ कर्दिजियेगा   क्युकी मानुष प्रवित्ति में दोस का होना एक सहज है ,,लेकिन सुधार व मार्गदर्सन की अभिलासा उसे जरुर रखना चाहिए ,उसी प्रकार यह आपका मित्र अर्थात  पंकज दुबे भी जीवन के संघर्ष के रह पर चल पड़ा है आशा ही नही पूरा भरोसा है की एक दिन मुझे अपनी मंजिल जरुर मिलेगी .,....धन्यवाद पंकज दुबे 09769365220

1 comments:

कविता रावत said...

आपने हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है यह जानकार बहुत अच्छा लगा, यदि आप बुरा न माने तो आपसे अपेक्षा कर सकते हैं हैं आप ब्लॉग पर अंग्रेजी शब्दों का कम प्रयोग कर हिंदी को प्राथमिकता देते रहेंगे ...बाकी आप पर निर्भर है....
आपका परिचय पढ़कर अच्छा लगा ..मैं भी आपकी पड़ोस से हूँ ..
हार्दिक शुभकामनायें..

Post a Comment