Sunday, 14 February 2016
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सायबर कैफे में नियमों की उड़ रही धज्जियां
विभाग के पास संचालित सायबर कैफे का आंकड़ा ही नहीं
सायबर कैफे में नियमों की उड़ रही धज्जियां
दबंग दुनिया।
रायपुर।
राज्य शासन सायबर जैसे अपराधों पर रोकथाम के लिए सायबर कैफे नियम 2009 तो बना दिया है, लेकिन उन नियमों का शहर में संचालित सायबर कैफे कितना पालन कर रहे है। इसकी जानकारी लेने वाला कोई अधिकारी नहीं है। जिसके आड़ में शहर के अधिकांश सायबर कैफों में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। जहां पाया कि अधिकांश सायबर कैफे में बिना किसी आईडी कार्ड व रिकॉड मांगे ही लोगों को इंटरनेट चलाने दिया जा रहा है। वहीं लोग भी नियमों का दरकिनार करते हुए घंटो इंटरनेट का उपयोग कर रहे है। जिसे रिकॉड के रूप में सिर्फ एक रजिस्ट्रर बना दिया गया है। जो हर दूसरे महिने में रद्दी हो जाती है। इसी कड़ी में दबंग दुनिया की टीम ने राजधानी के कुछ सायबर कैफे सेटरों की पड़ताल की।
आईडी नहीं मांगते ()
बुढ़ापारा तालाब स्थित श्याम टाईपराइटिंग इंस्ट्टियूट चला रहे दुकान संचालक से जब यह पूछा गया कि इंटरनेट का उपयोग कर रहे ग्राहकों से आईडी नहीं मांगते। जिस पर दुकानदार का कहना था कि कैफे नहीं चलाते है। जबकि दुकान में दो-तीन कंम्पयुटर इंटरनेट के उपयोग के लिए रखा गया है। साथ ही शॉप में आॅनलाइन फॉम, मनी ट्रांसपर जैसे कार्य भी होते है।
रजिस्टर में लिखवाते है ()
तात्यापारा में रेलवे, ट्रैवल के साथ सायबर कैफे भी चल रहे शॉप में इंटरनेट का उपयोग करने के लिए किसी खास पहचान पत्र की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि दुकान संचालक कहना है कि बहुत अधिक कस्टमर नहीं आते है। फिर भी जो ग्राहक इंटरनेट का उपयोग करने के लिए आते है उनका नाम, पता आदि रजिस्ट्रर में लिखवाते है। कैफे में चार कंम्पयुटर संचालित हो रहे साथ में बेव कैंप भी लगा है।
सिस्टम में दर्ज होता है ()
कबीर नगर में सायबर कैफे के लिए रजिस्ट्रर में भी नाम दर्ज करने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि कस्टमर की पूरी जानकारी इंटरनेट का उपयोग करने से पहले ही कंम्पयुटर में दर्ज हो जाती है। वहीं दुकान में पांच सिस्टम लगाए है। लेकिन सीसीटीवी, सायबर कैफे की जरूरी सूचना जैसे कोई भी नियम कैफे में नहीं दिखे।
कैफे का रिकॉड नहीं
राजधानी में इंटरनेट का प्रयोग करने वालों की संख्या जिस प्रकार तेजी से बढ़ रही है। ठीक उसी तरह आये दिन लोग किसी न किसी वजह से साइबर क्राइम का शिकार बन रहे हैं। लेकिन इससे बडीÞ चिंता और क्या हो सकती है कि सायबर सेल विभाग के पास राजधानी में कितने सायबर कैफे संचालित हो रहे। इसका कोई रिकॉड़ नहीं है। ऐसे में सिर्फ रजिस्टर्ड साइबर कैफों की संख्या शून्य होना प्रशासन की कार्यक्षमता, संचालकों की जागरुकता पर प्रश्न चिन्ह लगाती है।
साइबर से घटी कई घटनाएं
राजधानी में पिछले कुछ वर्षो से आॅनलाइन लाटरी के तमाम फर्जी ई-मेल भेजकर लोगों को ठगने के साथ महिलाओं और युवतियों को ब्लैकमेल की घटनाएं हुई। साथ ही कुछ ठग एटीएम कार्ड का नं.और पासवर्ड पूछकर ठगी कर रहे हैं। ऐसें में सायबर सेल के पास संचालित कैफे का कोई रिकॉड़ नहीं होना व रजिस्ट्रेशन न होना चिंता का विषय है।
बगैर रजिस्टेशन चल रहे साइबर
छग सहित राजधानी में लंबे समय से बगैर रजिस्ट्रेशन के साइबर कैफे चल रहे हैं। इसी तरह से बिना रजिस्ट्रेशन के ग्रामीण अंचलों में भी कई सायबर कैफे संचालित हो रहे है। इसमें सबसे ज्यादा अभनपूर, तिल्दा, उरला, हिरापूर, कबीरनगर, चंदखुरी, विरगांव आदि शहर से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में बगैर रजिस्टेशन के कई सायबर कैफे संचालित हो रहे है, लेकिन पुलिस और प्रशासन के पास इनकी कोई जानकारी ही नहीं है।
वर्जन
राजधानी में जितने भी सायबर कैफे संचालित किए जा रहे है उन्हे इंटरनेट युज करने वाले हर ग्राहक के पुख्ता रिकार्ड रखना आवश्यक है। यदि कही पर इसका पालन नहीं किया जा रहा है तो जांच करवाई जाएगी।
निरज चंद्राकर
शहर एएसपी
छग सायबर कैफे के नियम
सायबर कैफे में व्यक्ति की पहचान जरूरी
पहचान बताए बिना कम्प्यूटर के उपयोग की अनुमति नहीं।
स्कूल, कॉलेज का फोटोयुक्त पहचान पत्र, बैंक का केडिट कार्ड, मतदाता परिचय पत्र, पैन कार्ड ड्रायविंग लायसेंस।
दस्तावेज नहीं देने पर कैफे संचालक संबंधित व्यक्ति की वेब कैमरा से फोटो खीच सकेगा,लेकिन महिला उपयोगकर्ता की इतना फोटो लेना पर्याप्त होगा, जिसमें उसकी आंख और नाक दिखाई दे।
लॉग रजिस्टर संधारित करने के बाद उसे आॅनलाईन प्रारूप से लिंक करना होगा।
लॉग रजिस्टर को कम से कम एक वर्ष तक लिखित में और लॉग रजिस्टर के आॅनलाईन वर्सन में सुरक्षित रखना होगा ।
महिने के 05 तारीख तक लॉग रजिस्टर की मासिक रिपोर्ट, हार्ड और साफ्ट कॉपी के साथ थाने में देना होगा।
सायबर कैफे के भीतर यदि कोई पार्टीशन या क्यूबिकल बनाया गया है तो उसकी ऊंचाई फर्श के तल से साढ़े चार फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए।
विभाजन या क्यूबिकल को छोड़कर, सायबर कैफे में स्थापित प्रत्येक कम्प्यूटर का मुंह बाहर की ओर रखना होगा।
विभाजन या क्यूबिकल वाले कैफ में अवयस्क के साथ में अभिभावक जरूर रहे।
कैफे का निरीक्षण कोई भी सायबर पुलिस प्राधिकारी, किसी भी समय कर सकेगा।
कम्प्यूटर सिस्टम के समय को भारतीय मानक समय से मिलाकर रखना होगा।
सायबर कैफे खोलने अथवा बंद करने की सूचना संबंधित थाने को देनी होगी।
कैफे संचालक कैफे में अश्लील साइट्स देखना निषिध्द है, का बोर्ड भी प्रदर्शित करेगा।
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