माय नेम इज खान ,
तो माय नेम इज ठाकरे !
भारत देश जो कभी सोने की चिड़िया का देश कहा जाता था .जहा पर कई धर्म के लोग आपस मे मिलजुल कर रहते थे ..हर जाति के लोग एक दुसरे को अपना भाई मानता था और एक दुसरे के लिए जान देने के लिए तैयार रहता था ..........लेकिन आज के भारतीय को अब पहले अपने धर्म और जाति को बताना व बचाना होगा .....
कियोकी शाएद आज के राजनितिक लोगो को यह लग रहा है की भारत देश से बढकर यह बात है ... भारत देश की अन्य दूसरी समस्याओं से ज्यादा यह बात बड़ी लगने लगी है ...आज के राजनितिक अब अपने -अपने राज्यों मे इन्ही सब मुद्दों को भुनाने मे लग गये है और अपने पार्टी को बेहतर व सफल बनाने के लिए सायद इन मुद्दों को कैरमबोर्ड के खेल की तरह खेलना चाह रहे है .
मुंबई जिसे फिल्मो की दुनिया कहा जाता है जो देशऔर दुनिया को मनोरंजन करता है जहा कहा जाता है की मुंबई मे " पैसा उड़ता...है बस पकड़ने वाला चाहिए" अब यह तकमा पुराना हो गया है ..मुंबई अब शायद विवादों का शहर बन गया है जहा हर नये दिन विकास के बातो को भुला कर रोज नये मुद्दों को सीचा जा रहा है .....
अगर देखा जाय तो ...मास्टर बलास्टर सचिन तेंदुलकर ने एक प्रेस कांफ्रेंस मे कहा की मै पहले एक भारतीय हूँ तब जाकर महारास्तीय हूँ और मै देश के लिए खेलता हूँ ..
पूरी दुनिया मे भारत का नाम करने वाले मास्टर बलास्टर सचिन तेंदुलकर को भी कहा गया की राजनीत से दूर रहे तो .अच्छा रहेगा ....
मुकेश अम्बानी जिनके व्यपार से भारत देश को आर्थिक व काफी लोगो को रोजगार मिला है ,,,इंग्लैण्ड मे उन्होंने कहा की मुंबई सबकी है और सबका अधिकार है ...
तो उनको भी बता दिया गया की आप अपने काम पर ध्यान रखिये आपका जितना अधिकार आपके कम्पनी पर है उतना ही हर महारास्ती भूमिपुत्र का है
अब राहुल गाँधी ने अपने राज्य दौरे के समय कहा की मुंबई मे सबका अधिकार है बिहार ,,उ,प के लोग भी २६/११ के हमले मे शहीद हुए है ....
अब राहुल गाँधी ठहरे दिल्ली वाले फ्हिर भी मुंबई आने पर राहुल गाँधी को काले झंडे दिखाये जाए भगवा ने घोसना कर दिया अब अपने पार्टीय प्रमुख की बात को मस्तक की लकीर बना लिया और शुरू होगया बयानों को सिलसिला ....राहुल गाँधी मुंबई आये और कांगेश अपने राजकुमार की इज्जत तो बचा लिया लेकिन राहुल गाँधी भगवा के घर मे मिर्ची का धुँआ छोड़ गये .....
आस्टेलिया मे भारतीयों पर हमले हो रहे है हमारे छात्रो को मारा जा रहा है जिससे हम मुंबई मे उन्हें खेलने नही देगे ......अब शारुख खान के बयान की ipl me paak khiladiyo ko लेना चाहिए .भगवा को मिली जान और सवार हो गये ...लगे करने शेर की दहाड़ .........
अब शरुख कोई टैक्सी ,खोमचेवाले तो है नही जिन्हें हिंसक तरीके से समझाया जाय.... भगवा ने कहा की शारुख ...माफ़ी मागे नही तो पाक चले जाये...और माय नेम इज खान फिल्म को मुंबई मे प्रद्र्सिथ नही होने दिया जायगा .... शारुख ने कहा की मैंने गलत नही कहा तो माफ़ी किस बात की मै भारतीय हूँ मुझे म्हारास्ट से प्यार है आज मै जो भी हूँ महारास्ट की वजह से हूँ जहा -तहा शिवसेना मान तो गयी लेकिन क्रिसी मंत्री शरद पवार महगाई कम तो नही किया और पहुच गये मातोश्री .मे बाला बालासाहेब ठाकरे जी से मिलने आब बात बनते-बनते विगड गयी और फ्हिर भगवा की दहाड़-सुनाई पड़ी की हम फिल्म को रिलीज नही होने देगे जबतक की शारुख माफ़ी नही मागते है अब सबकी नजर पड़ गयी इन राजनितिक बयानों पर व्ही राज्य की सरकार शरद पवार से नाराज तो हुयी ...लकिन जगजाहिर नही कर पायी..और सरकार मे सामिल सभी पदों के मंर्ती लोगो को सुक्र्क्षा का भरोसा दे ने लगे ..और मुंबई के सभी थियेटर पर पोलिस का कड़ा पहरा लगा दिया गया और शिवसेना नाम के परिंदे पर ना मार पाए इसकी शक्त हिदायत दी गयी ... मुंबई पूरी छावनी मे बदल गयी ...और कई जगहों के विरोध के बाद माय नेम इज खान को रिलीज किया गया ..आखिर खान की तो जीत हो गयी लेकिन इन तमाम राजनितिक नेताओ को सायद इस बात का एहसास नही हुया की... हमारे इस बयान बाजी से भारत देश का कितना मान सम्मान बढेगा दुसरे देशो मे ....काश देश को चलाने वाले राजनेता को इस बात का एसास होता .....तो शायद यह नही कहा जाता की माय नेम इज ...............

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