सुनामी; सुनी कर जाती है जिन्दगी
सुनामी जो अपने नाम से ही बड़ा जाना पहचाना सा लगता है जिसके आने के बाद पूरा बुचाल ही नही मच जाता है बल्कि प्रकितिक का तहस- नहस तक हो जाता है यह तीन अक्षरों का नाम ना जाने कितनी बार तबाही मचाया है, जैसा की सुनामी जापान भाषा का शब्द है ,जो दो शब्दों त्सु (tsu) और नामी(nami ) से मिलकर बना है ऐसे इसे भैगोलिक रूप मे ज्वारीय धराये (tidal waves ) भी कहा जाता है,सुनामी आने की कुछ खास वजह तब मानी जाती है जब समुद्री क्षेत्र मे पृथ्वी की सतह के निचे पड़ी हुयी तक्तोनिक पलेट्स मे जोरदार हलचल होने लगती है और इस हलचल से वहा के जगहों मे बदलाव होने लगता है जिससे आपसी टकराव पैदा होने लगती है और इस टकराव से एक जोर की तीब्र उर्जा पैदा होती है जो समुद्री भूकंप का एक ब्यापक रूप धारण ग्रहण कर लेती है जिसके बाद समुद्री क्ष्तेरो मे उची- उची लहरे उठनी लगती है और जो सुनामी बनकर लाखो करोडो जान -माल पर कहर डाल देती है
तथा इसके आलावा ज्वालामुखी विस्फोट और भूस्खलन भी सुनामी की कुछ हद तक वजह मानी जाती है अब ये लहरे किसी महादिव्प के किनारे छोर पर उठे तो पानी अपने मूल अस्तर से दूर तक फ़ैल जाता है और काफी नुकसान पहुचाने लगता है
११मार्च ,२०११ को जापान के उत्तरी -पूर्वी इलाको मे भूकंप के बाद जापान मे जबरदस्त सुनामी ने अपना कहर गिराया जिसे सायद है कोई भूल पायगा. इससे पहले जापान मे सन १९०० मे भूकंप आया था जो विश्व का पाचवा बड़ा भूकंप मना गया था जिसकी तीब्रता रिक्टर पैमाने पर ८.९ मापी गयी थी सुनामी आने मे सबसे बड़ा रोल भूकंप का रहता है सिस्मोमीटर के माद्यम से भूकंप की तीब्रता को मापा जाता है जिसे सिस्मोग्राफी कहते है, 3 से कम रिक्टर की तीब्रता के भूकंप को सामान्य तौर पर माना जाता है जबकि ७ रिक्टर की ज्यादा तीब्रता को घम्भीर भूकंप माना जाता है और सुनामी की लहरों की रफ़्तार ४०० की. मी प्रति घंटे तक हो सकती है और समुद्र की लहरों की उचाई ३० फीट से भी जय्दा उठ सकती है ,अब कारन चाये भूकंप हो या सुनामी पर जब इनका कहर मानवो जीवन पर पड़ता है तो ना जाने कितने जान- माल का कोहराम देखने को मिलता है और लाख वैज्ञानिक उप्लाभ्धिया के बावजूद हमें बस संतोष है करना पड़ता है और फ्हिर व्ही पूरानी कहावतो पर सोचना पड़ता है की "आधी आवो तो बैठ गवाए " लेकिन जिन्दगी तो सुनी कर जाती है यह सुनामी की लहरे ??????????
लेखक
पंकज दुबे
पत्रकार
मुंबई
सुनामी जो अपने नाम से ही बड़ा जाना पहचाना सा लगता है जिसके आने के बाद पूरा बुचाल ही नही मच जाता है बल्कि प्रकितिक का तहस- नहस तक हो जाता है यह तीन अक्षरों का नाम ना जाने कितनी बार तबाही मचाया है, जैसा की सुनामी जापान भाषा का शब्द है ,जो दो शब्दों त्सु (tsu) और नामी(nami ) से मिलकर बना है ऐसे इसे भैगोलिक रूप मे ज्वारीय धराये (tidal waves ) भी कहा जाता है,सुनामी आने की कुछ खास वजह तब मानी जाती है जब समुद्री क्षेत्र मे पृथ्वी की सतह के निचे पड़ी हुयी तक्तोनिक पलेट्स मे जोरदार हलचल होने लगती है और इस हलचल से वहा के जगहों मे बदलाव होने लगता है जिससे आपसी टकराव पैदा होने लगती है और इस टकराव से एक जोर की तीब्र उर्जा पैदा होती है जो समुद्री भूकंप का एक ब्यापक रूप धारण ग्रहण कर लेती है जिसके बाद समुद्री क्ष्तेरो मे उची- उची लहरे उठनी लगती है और जो सुनामी बनकर लाखो करोडो जान -माल पर कहर डाल देती है
तथा इसके आलावा ज्वालामुखी विस्फोट और भूस्खलन भी सुनामी की कुछ हद तक वजह मानी जाती है अब ये लहरे किसी महादिव्प के किनारे छोर पर उठे तो पानी अपने मूल अस्तर से दूर तक फ़ैल जाता है और काफी नुकसान पहुचाने लगता है
११मार्च ,२०११ को जापान के उत्तरी -पूर्वी इलाको मे भूकंप के बाद जापान मे जबरदस्त सुनामी ने अपना कहर गिराया जिसे सायद है कोई भूल पायगा. इससे पहले जापान मे सन १९०० मे भूकंप आया था जो विश्व का पाचवा बड़ा भूकंप मना गया था जिसकी तीब्रता रिक्टर पैमाने पर ८.९ मापी गयी थी सुनामी आने मे सबसे बड़ा रोल भूकंप का रहता है सिस्मोमीटर के माद्यम से भूकंप की तीब्रता को मापा जाता है जिसे सिस्मोग्राफी कहते है, 3 से कम रिक्टर की तीब्रता के भूकंप को सामान्य तौर पर माना जाता है जबकि ७ रिक्टर की ज्यादा तीब्रता को घम्भीर भूकंप माना जाता है और सुनामी की लहरों की रफ़्तार ४०० की. मी प्रति घंटे तक हो सकती है और समुद्र की लहरों की उचाई ३० फीट से भी जय्दा उठ सकती है ,अब कारन चाये भूकंप हो या सुनामी पर जब इनका कहर मानवो जीवन पर पड़ता है तो ना जाने कितने जान- माल का कोहराम देखने को मिलता है और लाख वैज्ञानिक उप्लाभ्धिया के बावजूद हमें बस संतोष है करना पड़ता है और फ्हिर व्ही पूरानी कहावतो पर सोचना पड़ता है की "आधी आवो तो बैठ गवाए " लेकिन जिन्दगी तो सुनी कर जाती है यह सुनामी की लहरे ??????????
लेखक
पंकज दुबे
पत्रकार
मुंबई

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